तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

बिरगञ्ज, नेपालका  युवा कवि आलोक शूलभ लाल पेशाले इन्जिनियर हुन् । हाल कानूनका विद्यार्थी उनी नेपाली, अङ्ग्रेजी, बजिका, भोजपुरी र मैथिली गरी जम्मा पाँच भाषामा कविता  लेख्छन् । यिनै बहुभाषी कवि आलोक शूलभको भोजपुरी भाषामा लेखिएको एउटा असाध्यै सरस कविता प्रस्तुत छ आजको ‘मातृभाषा कविता’मा:


तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !


देखेमे तनको निमन नैखे, मध खानि करिया
ढीबरी लेके नु खोजत रहिने, दिने-दुपहरिया
सुन्दरताके मोलभाव, रंगवासे करके आगैल
मानवशास्त्रमे PHd करके, बताव का कैल
एकरोज बाते-बात पर, भौजी खिसिया गैनी
करिया भौजीके मन करिया, हमहू सुनादेनी
तब मन करेला, जाके मोहल्लामे छिटवादी
तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

बेटा-बेटीमे भेदभाव देख हमनीसे नानु होला
सझिया चाय पियतबेरा, हर रोजे इहे कहेल
बेटवा इन्जिनियर आ बेटी आर्ट्समे स्नातक
माकिर बेटीके रुझान त बिज्ञानमे नु रहलख
हमरासे पुछ्ले त रहल, हो बेटीके का पढाइ
हमहु कह्देनी आर्ट्स, तैइके खर्चामे होजाई
तब मन करेला जे लाउडस्पिकरमे फुकवादी
तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

दहेज लेहल आ देहल दुनु अपराधिक घटना
अभियानी बनत फिरेल हर जिल्ला जवारमे,
कादून जेठ्की बेटीके जे बियाह कैल पटना
१० लाख नगद रहे, आ बिदाइ सेन्ट्रो कारमे
उहे बियाहके डिजेमे, हमहु खुब नचले बानी
जानकारी होखते भी, बिरयानी घिच्ले बानी
तब मन करेला, हर जगहीया पर्चा बटवादी
तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

लोगनके अपन बेटी शोर्ट्समे मोडर्न लागेला
दोसराके शोर्ट्समे देखते नु आँख गड जाला
४५ के उमीरमे,१६ बरिषके जे ताकत फिरेल
काजान हर कांडके बेरिया हमरेके तू चिनेल
मेहरारू नैइहरमे बारी, रे कौनो व्यवस्था कर
सझियाले होजाई जुगाड, तू बस धिरज धर
तब मन करेला कि जाके पत्रीकामे छपवादी
तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

१२ मुसहरके अपना मिलवामे काम लगाइने
समाजमे देख ल, खुबे नामप्रतिष्ठा कमाइने
उहे मिलके मेसमे, मेनेजर ला मांस पाकेला
चुरा-मिठा खात, मजदुरन के लैका ताकेला
बात कर अईनि, सप्ताहमे मछरि खियावेके
माने छिपवा, लोटवा अपन घरेसे लियावेके
तब मन करेला सुनहरा आखरसे लिखवादी
तू हो हाइपोक्राइट, आ हमहू हाइपोक्राइट !

सुनेनी हाइपोक्राइसिके भी एगो डिग्री होला
कौनोके लेवल सामान्य, कौनो घातक होला
हई एतना, हउ ओतना, काजाने कौन केतना
एक लेखासे देख्लापर, सभिनके भ्रष्ट चेतना
अपने बताई का फरक बा ज्यादा आ कममे
कुछ ना कुछ मात्रा त देख्ले गईल बा सबमे
अब त मान गैनी नु?, अपना मनके सम्झादी
हर एकमे हाइपोक्रेसी हर केहू हाइपोक्राइट !



 

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