आतंकी गाम

भारतमा जन्मिएर मैथिली भाषमा कविता लेख्ने कवि कामिनी कामायनीको एउटा मैथिली कविता आज काव्यालयको मातृभाषा कवितामा प्रस्तुत छ । कवि कामिनीको जन्म भारतको एक पर्यटकिय शहर ‘सासाराम’मा भएको हो । राजनीति विज्ञानमा पि.एच. डी. गरेकी कवि कामायनी मैथिली भाषामा राम्रो कलम चलाउँछिन् । आतंकी गाम, आधुनिक स्त्रीगण (भाग १  देखि ५सम्म), जहिया ओ इतिहास सुनौलक, शहरी सभ्यता, लिखत के प्रेम गीत, अहिल्या, प्रलाप कंसक लगायतका उनका मैथिली भाषामा लेखिएका लोकप्रिय कविताहरू हुन् ।

प्रस्तुत छ उनको कविताः  

आतंकी गाम

हाथ पएर मोड़ने
ओ सुतल सुतल सन गाम
जतय एखनो किओ किओ
गाबैत छलपरातीझुमरिआ कजरी
जतय अखनों पीबैत छल
विभेदक वावजूदसंग संग पानिएके घाट प
बाघ आ बकरी।

खरिहान मे दूर दूर धरि पसरल धान
हसैत –ठिठियाति लोक के छलै भरि मुंह पान।
नव नुकूत प्रेमक होईत छल चर्च
नीक बेजाय मेहोईत छल बुद्धि खर्च।
जतय एखनहु बांचल छल
आंचरक लाज
मन जांति कजन्निजाति
करैत छल अपन अपन काज।
जतय एखनो भोर स साँझ धरि
बनैत छल किसिम किसिम के भानस
जीवन स तृप्तसुखासन प बैस
ज्ञानी ध्यानी पढे छलाह मानस।
जतय एखनों ठाढ़ छल पुआरक
बड़का टाल
आ किल्लोल करैत धिया पूता
होय छल निहाल।
ओहि सुतलओंघायल सन गाम मे
पैसि गेल छल एक दिन
किछू अंनचिन्हारअजगुत
जेकर बग्गे बानी सेहो कहने दन।

हाथ मे कड़गर हरियर हरियर नोट आ बंदूक
ओ सब बैसाहे आयल छलशांतिपसारि क एक गोट भ्रांति
खेत खरिहान मे उपजाबय लेल
बारूदआरडिएक्स।

छीटैत रहल पाय पर पाय
आ देखैत देखैत
भ गेलै विषाक्त
गामक पोखरि
बन्न भ गेले अजान,कीर्तन आ पराती
डेरा गेल बिहुसैत समाज
ओतय आब काबिज अछि
भयोंनगरजैत
लाल लाल आंखिमुंह स बोकरेत
आगि सन
आतंकक घिनौन साम्राज्य॥

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